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पुरुषों ने सदैव से स्त्री को अपने भोग की वस्तु की तरह, जैसे चाहा, वैसे ही प्रयोग किया है। आज की स्त्री, पहले जैसी नहीं रही है। अब वह जानती है कि अन्य सब बातों के अलावा, उसे अपने पति से यौनतृप्ति की सुखानुभूति पाने का भी मौलिक अधिकार है, जिससे उसे वंचित करना, उसके प्रति सबसे बड़ा अपराध है। इस अपराध के लिये कोई भी पत्नी, अपने पति को कभी भी क्षमा नहीं कर सकती। क्षमा करना भी नहीं चाहिये। इसलिये मेरा ...आगे पढ़ें... 

अभिशप्त दाम्पत्य!
विवाह के बाद आधुनिक कहलाने वाली पत्नियाँ, अपने पतियों पर, जरूरत से ज्यादा शिकंजा कसना चाहती हैं। यही ... Dr Purushottam Meena Nirankush द्वारा 23 नवंबर, 2009 1:29:00 AM TPT पर पोस्टेड